मानसिकता 302

कानून के पीछे का दिमाग

By: Shubham

Paperback: ₹249.00
eBook: ₹179.00

ISBN: 978-93-343-4750-0

Language: Hindi

Genre: Law Fiction

Stock: 10

“मानसिकता 302 – कानून के पीछे का दिमाग”
यह उपन्यास केवल एक अपराध कथा नहीं है।

यह उस महीन रेखा की पड़ताल है जहाँ अपराध, मानसिक रोग और कानून एक-दूसरे से टकराते हैं। यह उस जटिल दुनिया की झलक देता है, जहाँ एक हत्यारा "मैं पागल हूँ" कहकर खुद को कानून से बचाने की कोशिश करता है — और कभी-कभी बच भी जाता है।
इस पुस्तक का नायक एडवोकेट शिवम सिन्हा, लखनऊ का एक युवा, नैतिक, और तेज़ दिमाग वाला वकील है। वह केवल मुक़दमे नहीं लड़ता, बल्कि सिस्टम से लड़ता है — उस व्यवस्था से जो कभी मासूमों को सज़ा देती है और कभी अपराधियों को बचा लेती है।
"मानसिकता 302" एक काल्पनिक कहानी है, लेकिन इसकी जड़ें भारतीय दंड संहिता की धारा 84, मानसिक स्वास्थ्य कानूनों और वास्तविक अदालती केसों में गहराई से जुड़ी हैं। इसमें मनोविज्ञान, न्यायशास्त्र, और नैतिकता के जटिल सवालों से टकराया गया है।
पाठकों को यह पुस्तक केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सोचने की चुनौती भी देगी —

क्या हर मानसिक रोगी निर्दोष होता है?

क्या कानून को सच में समझने वाला अपराधी उससे बच निकल सकता है?

और सबसे महत्वपूर्ण — क्या न्याय केवल किताबों में लिखा हुआ एक शब्द है, या उसे हर बार फिर से गढ़ना पड़ता है?
यह पुस्तक उन पाठकों को समर्पित है
जो केवल कहानी नहीं पढ़ते —
बल्कि उसके पीछे छिपी सच्चाई को टटोलते हैं।